विनम्रता : Being Docile

नहीं पूछते कभी गगन से, क्यों वह घर नहीं जाता है ? और सूर्य से यह , की क्यों वह धूप  यहाँ फैलाता  है ? पूछा नदिया से यह,  कल-कल स्वर में शोर मचाती क्यूँ  ? और ऊँचे निर्झर से पूछों , जल में धुंध उठा दी क्यूँ ? पूछा कभी बेल से, क्यों वह… Read More विनम्रता : Being Docile

ऋजुता : Honesty

अधरों पर सजता सलज हास उर में शीतलता का विकास दृग में अटके कुछ मुक्ताकण निःस्वार्थ  नेह का सहज भास् कौतुक  से टप-टपती  पलकें बच्चों जैसा विस्मय अगाध जिद्दी मन, चिंतन अति गूढ़ जाने कैसा मिश्रण प्रगाढ़ दुर्लभ लगती यह सृष्टि पर है सरल लभ्य, बड़ा ऋजु मार्ग बस, ऋजुता ही पा  जाते जो नहीं… Read More ऋजुता : Honesty

नेह का मोल

बस यही नेह  का मोल ? नभ छोर छोड़ कर क्यूँ जाऊँ संशय से मन में सकुचाउँ बंधन में जाकर अकुलाऊँ जब  नील तरी में कर आऊँ मैं, मेघों के साथ हिंडोल ? कोमल मन, अधर विहँसते  हैं मृग शावक के से नैनों में वासंती स्वप्न विचरते हैं फिर क्यों इस स्वछंद स्वप्न  में लूँ… Read More नेह का मोल

Living Life.. simply.

जीवन पथ का पाथेय यही , खुद की पहचान समझ लेना  जग में अपनी निजता लय कर निज में ही जग को पा जाना। sustenance of life is realisation of  the self. harmonize ‘self ‘ in the world  to find the world …in oneself . जीवन  – life ,  पथ  –  way , path , road… Read More Living Life.. simply.

पाथेय

वह स्मृति पाथेय बनी है  थके पथिक की पंथा को  सीवन उधेड़ कर देखोगे  क्या तुम मेरी कंथा को